भारत और अर्जेंटीना के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर
भारत और अर्जेंटीना ने व्यापार और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई नए क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें लिथियम और अन्य खनिज, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, डिजिटल सेवाएं, दूरसंचार और स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल हैं। यह प्रगति 24 अगस्त 2026 को ब्यूनस आयर्स में हुई India-Argentina Joint Trade Committee (JTC) की चौथी बैठक के बाद सामने आई है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने किया, जबकि अर्जेंटीना की ओर से International Economic Relations के सचिव और राजदूत फर्नांडो ब्रुन ने प्रतिनिधित्व किया। बैठक में 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अर्जेंटीना यात्रा के दौरान तय किए गए रोडमैप की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
2025 में दोनों देशों का व्यापार USD 6.5 बिलियन के पार
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार भारत और अर्जेंटीना के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में USD 6.5 बिलियन से अधिक हो गया। दोनों देशों के बीच व्यापार में सालाना 17 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत अब अर्जेंटीना का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालांकि, दोनों पक्षों का मानना है कि व्यापारिक वस्तुओं की सूची को और व्यापक बनाया जा सकता है और बाजार तक अधिक संतुलित पहुंच के लिए reciprocity महत्वपूर्ण होगी।
लिथियम और महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ा फोकस
बैठक में critical minerals पर विशेष ध्यान दिया गया। इनमें लिथियम प्रमुख है। भारत की सरकारी कंपनी KABIL अर्जेंटीना के lithium sector में खनन अवसरों पर काम कर रही है।
Catamarca में KABIL की गतिविधियों में Phase II drilling पूरी हो चुकी है। इसके अलावा Salta और Jujuy प्रांतों में भी आगे के अवसर तलाशे जा रहे हैं।
बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और clean-energy supply chains के लिए लिथियम का रणनीतिक महत्व बढ़ रहा है। हालांकि किसी परियोजना का वास्तविक आर्थिक लाभ उसके commercial development और execution पर निर्भर करेगा।
भारतीय कृषि उत्पादों के लिए बाजार खुलने की दिशा में प्रगति
भारतीय कृषि उत्पादों को अर्जेंटीना के बाजार में प्रवेश दिलाने के लिए sanitary and phytosanitary यानी SPS requirements पर तकनीकी स्तर की बातचीत आगे बढ़ रही है।
इन चर्चाओं में प्याज, दूध और दुग्ध उत्पाद, अंगूर, आलू, केले और दालें शामिल हैं। SPS प्रक्रियाओं में प्रगति भारतीय कृषि निर्यातकों के लिए विदेशी बाजार में प्रवेश की एक महत्वपूर्ण बाधा कम कर सकती है।
इससे किसानों, food processors और exporters के लिए अर्जेंटीना में नए कारोबारी अवसर पैदा होने की संभावना है।
भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए बाजार पहुंच आसान होने की उम्मीद
फार्मास्यूटिकल सेक्टर भी बातचीत का प्रमुख हिस्सा रहा। अर्जेंटीना ने अपने pharmaceutical regulatory framework के तहत भारत को Annex II से Annex I में लाने की दिशा में काम करने और भारतीय दवाओं के प्रवेश से जुड़ी बाधाओं को कम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
यदि regulatory recognition से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो पात्र भारतीय pharmaceutical companies के लिए अर्जेंटीना के बाजार तक पहुंच बेहतर हो सकती है। यह प्रयास 2019 में Argentina की ANMAT और India की CDSCO के बीच हुए सहयोग समझौते पर भी आधारित है।
दोनों देशों ने Ayurveda और Yoga जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है।
5G, AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेस पर भी सहयोग
भारत-अर्जेंटीना आर्थिक एजेंडा अब पारंपरिक वस्तु व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने aviation, telecommunications, digital services और space technology में भी नए सहयोग की संभावनाएं पहचानी हैं।
विशेष रूप से 5G, artificial intelligence और digital infrastructure जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई। Space sector में ISRO और Argentina की CONAE के बीच आगे सहयोग की संभावनाएं भी सामने आईं।
India-MERCOSUR व्यापार समझौता भी महत्वपूर्ण
India-MERCOSUR Preferential Trade Agreement को भी बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। Terms of Reference पर प्रगति और digital certificates of origin को अपनाने से cross-border trade को अधिक कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।
भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर trade documentation और प्रक्रियाएं MERCOSUR से जुड़े बाजारों में निर्यात को संभालना आसान बना सकती हैं।
अर्जेंटीना पहुंचा भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल
JTC बैठक के बाद 25 अगस्त 2026 को Buenos Aires में India-Argentina Business Forum आयोजित किया गया।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने अर्जेंटीना के लिए भारत के पहले और सबसे बड़े business delegation का नेतृत्व किया। इसमें 25 से अधिक business leaders शामिल थे। UPL, Kirloskar और Aditya Birla Group जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए।
Business Forum में agriculture, minerals, energy, pharmaceuticals, healthcare, tourism, banking और telecommunications जैसे क्षेत्रों में संभावित व्यापार और निवेश साझेदारियों पर चर्चा हुई।
भारतीय कारोबारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
नवीनतम बातचीत से अर्जेंटीना में कारोबार तलाश रही भारतीय कंपनियों के लिए कई संभावित अवसर सामने आए हैं। खासकर कृषि, फार्मा, टेक्नोलॉजी, minerals और infrastructure sectors में संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि, किसी बाजार तक पहुंच पर बातचीत शुरू होना अपने आप में तत्काल निर्यात की अनुमति नहीं है। कंपनियों को अर्जेंटीना के संबंधित regulatory, technical, sanitary, labelling और commercial requirements को पूरा करना होगा।
अर्जेंटीना को target करने वाले कारोबारियों को SPS arrangements, pharmaceutical regulatory recognition, lithium projects, trade documentation और India-MERCOSUR framework की आगे की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।
भारत-अर्जेंटीना साझेदारी अब कई नए क्षेत्रों तक पहुंची
JTC की हालिया बैठक से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध केवल पारंपरिक वस्तु व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं। कृषि और pharmaceuticals महत्वपूर्ण बने हुए हैं, जबकि lithium, digital technology, space और telecommunications भविष्य के रणनीतिक क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं।
सरकारों के बीच बातचीत और कंपनियों के बीच सीधे संपर्क से आने वाले समय में द्विपक्षीय समझौतों को वास्तविक commercial opportunities में बदलने में मदद मिल सकती है।
मुख्य निष्कर्ष
भारत और अर्जेंटीना अपनी आर्थिक साझेदारी को पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। 2025 में द्विपक्षीय व्यापार USD 6.5 बिलियन से अधिक रहा। इसके साथ भारतीय कृषि उत्पादों के market access, pharmaceutical regulatory recognition और lithium opportunities पर बातचीत आगे बढ़ी है। Digital technology, telecom, aviation और space cooperation इस साझेदारी को आगे और व्यापक बना सकते हैं।