नई दिल्ली में BRICS Summit का दूसरा दिन
नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS Summit का आज 13 सितंबर 2026 को दूसरा दिन है। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन के दूसरे दिन BRICS के साझेदार देशों और आमंत्रित देशों के नेताओं पर विशेष ध्यान रहेगा।
सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में हो रहा है और इस साल की अध्यक्षता का विषय लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए एक मजबूत BRICS पर केंद्रित है।
आज साझेदार देशों के नेताओं और अन्य आमंत्रित प्रतिनिधियों के पहुंचने के बाद ऐसा सत्र होगा जिसमें समावेशी वैश्विक विकास, आर्थिक सहयोग और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।
आज BRICS Summit में क्या होगा?
सम्मेलन के तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह से BRICS के साझेदार देशों और आमंत्रित देशों के नेता भारत मंडपम पहुंचेंगे। इसके बाद सभी नेताओं का सामूहिक फोटो सत्र होगा।
इसके बाद समावेशी वैश्विक विकास के लिए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास विषय पर खुला सत्र आयोजित होगा।
इस बैठक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की साझा चुनौतियों पर चर्चा होने की संभावना है।
पहले दिन नई दिल्ली घोषणापत्र पर बनी सहमति
सम्मेलन के पहले दिन BRICS देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया।
घोषणापत्र में राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक और वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति दोहराई गई।
इसके साथ ही अधिक न्यायपूर्ण और प्रतिनिधित्व वाली वैश्विक व्यवस्था, टिकाऊ विकास और समावेशी आर्थिक विकास पर जोर दिया गया।
भारत के लिए यह घोषणापत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और उसकी कोशिश है कि संगठन का ध्यान केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रहे, बल्कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर मजबूत किया जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया है।
इसी वजह से BRICS बैठक में वैश्विक संस्थाओं में सुधार, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, विकास के लिए वित्त और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
दुनिया में चल रहे संघर्षों पर भी चर्चा
नई दिल्ली घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत, आपसी चर्चा और कूटनीति के जरिए हल करने पर जोर दिया गया है।
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व सहित दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बना हुआ है।
BRICS देशों ने नागरिकों की सुरक्षा, देशों की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की जरूरत पर भी जोर दिया।
टैरिफ और वैश्विक व्यापार भी बड़ा मुद्दा
BRICS बैठक में व्यापार नीति भी महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं पर चिंता जताई है।
भारत के लिए यह मुद्दा खास है क्योंकि निर्यात, विनिर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति और वैश्विक बाजार तक आसान पहुंच के लिए स्थिर व्यापार व्यवस्था जरूरी है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर जोर
BRICS देशों के बीच सीमा पार भुगतान को आसान बनाने और व्यापार में सदस्य देशों की अपनी मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी चर्चा जारी है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में ऐसे भुगतान को ज्यादा आसान और प्रभावी बनाने के प्रयासों का समर्थन किया गया है।
इसका उद्देश्य व्यापार में होने वाली अतिरिक्त लागत और भुगतान से जुड़ी दिक्कतों को कम करना है।
क्या BRICS की अपनी अलग मुद्रा शुरू हो गई?
नहीं। अभी BRICS ने कोई एक साझा मुद्रा शुरू नहीं की है।
फिलहाल ध्यान इस बात पर है कि सदस्य देश अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान को आसान बनाएं तथा मौजूदा वित्तीय संस्थाओं के जरिए स्थानीय मुद्रा में वित्त उपलब्ध कराया जाए।
इसलिए BRICS की चर्चा को सीधे किसी नई साझा मुद्रा की घोषणा समझना सही नहीं होगा।
AI और तकनीक पर भी बढ़ता जोर
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI भी BRICS के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में भरोसेमंद, समावेशी और ऊर्जा की बचत करने वाली AI व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई है ताकि विकासशील देशों को भी नई तकनीक का लाभ मिल सके।
भारत ने डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, विज्ञान और अनुसंधान तथा तकनीक से जुड़े सहयोग को भी अपनी BRICS अध्यक्षता में आगे बढ़ाया है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी नजर
BRICS देशों ने सुरक्षित और विविध ऊर्जा आपूर्ति तथा मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत पर जोर दिया है।
घोषणापत्र में यह भी माना गया है कि विकासशील देशों के लिए ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया एक जैसी नहीं हो सकती और कई देशों में आने वाले समय तक पारंपरिक ईंधनों की भूमिका बनी रहेगी।
यह रुख अलग-अलग देशों की आर्थिक स्थिति और ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बदलाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश दिखाता है।
भारतीय कारोबार के लिए BRICS क्यों जरूरी है?
भारतीय कंपनियों के लिए BRICS का महत्व अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है। भुगतान व्यवस्था, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, तकनीकी साझेदारी, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में सहयोग सीधे कारोबार पर असर डाल सकता है।
अगर सदस्य देशों के बीच भुगतान आसान होता है, व्यापार में रुकावटें कम होती हैं और नए बाजार खुलते हैं तो भारतीय निर्यातकों, विनिर्माण कंपनियों, स्टार्टअप और निवेशकों को लाभ मिल सकता है।
मोदी-शी बातचीत से भी बढ़ी उम्मीद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी BRICS सम्मेलन से अलग मुलाकात की।
दोनों नेताओं के बीच व्यापार, बाजार तक पहुंच, परिवहन संपर्क और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारतीय कारोबार के लिए इन बातचीत का महत्व इसलिए है क्योंकि चीन के साथ व्यापार, आयात, निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला का भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर है।
आज किन बातों पर नजर रहेगी?
आज सबसे ज्यादा नजर साझेदार देशों और आमंत्रित देशों के साथ होने वाली चर्चा, नेताओं के बयानों और व्यापार, तकनीक, ऊर्जा तथा विकास के क्षेत्र में किसी नए फैसले पर रहेगी।
भारत अपनी पूरे साल चली BRICS अध्यक्षता के दौरान शुरू की गई पहलों के ठोस परिणाम भी सामने रखने की कोशिश करेगा।
BRICS और ग्लोबल साउथ के लिए इसका क्या मतलब है?
नई दिल्ली सम्मेलन से यह संकेत मिलता है कि BRICS खुद को केवल पुराने सदस्य देशों के समूह के बजाय विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बड़े मंच के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है।
नए सदस्यों और साझेदार देशों की बढ़ती भागीदारी भारत को एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और दूसरे विकासशील क्षेत्रों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का अवसर देती है।
मुख्य निष्कर्ष
नई दिल्ली में BRICS Summit का दूसरा दिन आज शुरू हो रहा है और साझेदार देशों तथा आमंत्रित देशों की भागीदारी पर मुख्य ध्यान है। पहले दिन नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली, जिसमें वैश्विक व्यवस्था, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, विकास और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों ने अपना रुख रखा। भारत के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इन व्यापक घोषणाओं को व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास के क्षेत्र में ठोस सहयोग में बदलना है।